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About Ritanveshi

ऋतान्वेषी एक दर्शन है, सत्य की खोज है एवं चेतना की सतत यात्रा है। यह सनातन संस्कृति की अनंत अकथ अगाध विस्तार में एक नन्हा ज्योति है जो पथिकों को सिद्ध से मिलाने का मार्ग प्रशस्त करता है। अपनी संस्कृति को संरक्षण और संवर्धन करना ही ऋतान्वेषी का उद्देश्य है। इसका प्रतीक विशिष्ट यंत्र है जिसका मूल मंत्र है परा अपराऔर परापरा। अपरा इस संसार के सत्य को कहते हैं इस संसार से परे अलौकिक सत्य को परा कहते हैं एवं इन दोनों के मध्य का सत्य परापरा है। परम सत्य शून्य स्वरूपा है यदि इसका कोई प्रतीक हो सकता है तो वह बिंदु है, जिसकी न कोई लंबाई न कोई चौड़ाई ना कोई क्षेत्रफल है। बिंदु ब्लैक होल का प्रतीक है। सनातन मान्यता यह है कि बिंदु से अमृत चूता है और यह अमृत प्राण और ऊर्जा को निर्मित करता है जिससे सृष्टि होती है। ऋतान्वेषी का प्रती क भी बिंदु से अमृत चूता हुआ दृश्य है जो दो दल कमल रुपी आज्ञा चक्र मे विसर्जित हो रहा है। यह यंत्र अकथ त्रिकोण को भी दर्शात है जो एक दिव्य मंडल है।

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Ritanveshi dares to believe in the truth, dares to practice the truth!
Ritanveshi is a means, and effect is spiritual regeneration of whole mankind.

The goal of Ritanveshi is spiritual against the material, fulfilling the diverse requirements of living in a balanced manner, so that no aspect is over-emphasized.

Our belief is to promote serious study and research in the spiritual arena created by ancient Rishis of Bharatvarsha, in order to bring about personal integration in the life of an individual on spiritual, religious, psychological and social levels.

This can be done by enabling people to create a vital link between their faith and their daily lives. Ritanveshi pursues to heal the dichotomy between the human and the divine. With a clear vision and mission, Ritanveshi is divided into four segments: Education, Tourism, Health and Rit Kart.