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 कार्तिक पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था। इसी खुशी में देवताओं ने दीप प्रज्ज्वलित किये थे। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाने की परंपरा है।

कार्तिक पूर्णिमा शुभ मुहूर्त

कार्तिक पूर्णिमा तिथि प्रारंभ - 18 नवंबर 2021 दोपहर 12:00 बजे से

कार्तिक पूर्णिमा तिथि समाप्त - 19 नवंबर 2021 दोपहर 02:26 बजे

कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रोदय का समय - 17:28:24

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

 

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा का यह दिन धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है। कार्तिक पूर्णिमा का दिन देवताओं को प्रसन्न करने का दिन है। इसलिए इस दिन लोग गंगा में डुबकी लगाकर दान-पुण्य करने से पुण्य की प्राप्ति करते हैं। कार्तिक स्नान और भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को अपार सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र नदी या जलकुंड में स्नान करना चाहिए, दान-पुण्य करना चाहिए और दीपक जलाना चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा पर धार्मिक समारोह करने के लिए सबसे शुभ दिनों में से एक दिन है। इसलिए इस दिन कई रीति-रिवाजों और त्योहारों का समापन होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य खुशी लाते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि

  • कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।
  • हो सके तो पवित्र नदी में स्नान करें। यदि आप नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगा जल मिलाकर स्नान करें।
  • हो सके तो इस दिन भोजन न करें और फल का सेवन करें।
  • इसके बाद देसी घी का दीपक जलाकर लक्ष्मी नारायण की पूजा करें।
  • इस दिन सत्यनारायण की कथा का पाठ करने से भगवान की कृपा मिलती है।
  • इस दिन भगवान को खीर का भोग लगाना चाहिए।
  • शाम को लक्ष्मी नारायण की आरती करने के बाद तुलसी जी में घी का दीपक जलाएं और घर के चारों ओर दीपक जलाएं।

कार्तिक पूर्णिमा क्यों मनाते हैं?

 

शिव पार्वती के सबसे बड़े पुत्र भगवान कार्तिकेय के बारे में भी एक कहानी है, जो इस दिन उनकी पूजा करने के महत्व का वर्णन करती है। ऐसा कहा जाता है कि जब उनके छोटे भाई श्री गणेश को पहले पूजा करने की प्रतियोगिता में विजयी घोषित किया गया, तो कार्तिकेय बहुत क्रोधित हो गए और साधना करने चले गए। जब शिव और पार्वती उन्हें मनाने के लिए गए, तो उन्होंने क्रोध में शाप दिया कि यदि कोई महिला उन्हें देखने आएगी, तो उन्हें सात जन्म भुगतने होंगे और यदि एक पुरुष ने ऐसा करने की कोशिश की, तो वह मृत्यु के बाद नरक में जायेगा। बाद में, किसी तरह महादेव और देवी ने उनके क्रोध को शांत किया और कहा कि एक दिन उनके दर्शन के लिए होना चाहिए, तब कार्तिकेय ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा पर उनके दर्शन बहुत फलदायी होंगे। इसलिए अब वह साल में एक बार दर्शन देते हैं। इसलिए उनका एक ही मंदिर है जो ग्वालियर में है। 400 साल पुराना बताया जाता है कि इस मंदिर के कपाट साल में एक बार कार्तिक पूर्णिमा की रात को खोले जाते हैं और सुबह स्नान के बाद एक साल के लिए बंद कर दिए जाते हैं।