ऋतान्वेषी दर्शन

ऋत वह तत्व है जो लौकिक-अलौकिक ब्रह्मांडीय धार्मिक स्थिति एवं सम्यक प्राकृतिक सनातन व्यवस्था और संतुलन के  सिद्धांत को नियमित स्थिति में रखें।ऋत सुव्यवस्थित सत्य का मूल सिद्धांत है,मानवीय धर्म और कर्म की सनातन रूपरेखा है।अन्वेषी उस खोजी मुमुक्षाथी को दर्शाता है,जो ऋत को उपलब्ध होना चाहता है।अतः ऋतान्वेषी सत्य के खोजकर्ताओ का समूह है जो यह व्यवस्था करता है कि योग् मित्रों का योग सिद्धो से उपयुक्त संयोग हो पाए |

ऋतंभरा – सनातन विज्ञान

ऋतंभरा वह प्रज्ञा है, जो चेतना की उच्च स्थिति में प्राप्त होती है एवं जो ऋत से परिपूर्ण होती है। समस्त ज्ञान-विज्ञान और सनातन विधाएं यहीं से उदित होती हैं। यह विधाएं परंपरागत रूप से सृष्टि में विस्तृत होती रहती है, जिससे जीवो को उसकी गति और नियति प्राप्त होती है तथा स्वास्थ्य का संचार होता रहता है। स्वास्थ्य अर्थात स्वयं में स्थिति, जो ऋत को अपनाने से ही संभव है। ऋतंभरा वह सनातन विज्ञान है जो स्वयं एवं सृष्टि की संतुलित स्थिति को प्राकृतिक सिद्धांतों द्वारा  पुष्पित एवं पल्लवित करता है।

परामानस विज्ञान शोध संस्थान

परामानस विज्ञान शोध संस्थान ऋतान्वेषी योगायन की केंद्रीय परिकल्पना है। यह संस्थान सनातन सत्य के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु वे समस्त प्रयास जो जीवित या मृतप्राय सनातन प्रथाओ,विधाओं एवं प्रज्ञावान विद्वानों को सम्मानित एवं योग्य स्थान के अधिष्ठान के लिए समर्पित है। वे सभी विद्याओ  एवं सिद्धो  जो अपने अलौकिक प्रज्ञा और विद्या द्वारा हजारों वर्षों से भारत भूमि को सनातन सत्य से सिंचित कर रहे हैं, उनका यथा योग्य सम्मान तथा आधुनिक शोध विज्ञान द्वारा उन्हें पुनः परिभाषित करना ही इस संस्था का उद्देश्य है। शोध उपरांत सत्य को सामाजिक व्यवस्था में पुनः स्थापित करना भी संस्थान का ही कार्य है। यह संस्थान परामानस विज्ञान की प्राचीन से लेकर आधुनिक मापदंड एवं प्रणालियों पर भी शोध करेगा

योगायन -योग मंडल

योगायन उन योगियों का मंडल है जो जीवन के समस्त उपयोगी आयामों का सनातन योग विज्ञान द्वारा संवर्धन और सामाजिक विकास का संचार करता है। योग विद्या वर्तमान की सर्वाधिक समीचीन आवश्यक विद्या है परंतु अधिकांशतः प्रचारक दशा और दिशा से विक्षिप्त है। योगायन विशुद्ध योग के जीवित परंपरा की निरंजन ज्योति है, जो कलियुगी रात्रि काल के चिरंतर तारामंडल के सानिध्य में टिम-टिमा रहा है। योगायन ऋत के अनुपालन में सदैव जागृत है और योगपथ ही ऋतान्वेषी का अभीष्ट सर्वोच्च मार्ग है।योगायन योगअध्ययन ,शोध,कलाप्रशिक्षण,समग्र चिकित्सा इत्यादि सभी प्रारूप में मानव कल्याण का योग मंडल तैयार करता है।

विश्रांति -तीर्थ विहार

विश्रांति एक अद्भुत आध्यात्मिक तीर्थ यात्रा है जो आनंद,शांति और समृद्धि को उपलब्ध कराता है। शास्त्र तीर्थ-विहार में विश्रांति हेतु दस विधाऔषधम की स्तुति करते हैं दृश्य, शब्द,तर्पण,अर्पण, मांगलिक कर्म,उपासना,आहार-विहार, हितेभ्य,अथ्भ्यै और मनोनिग्रह विश्रांति तीर्थों -विहार इन दस विधाओं को परिलक्षित कर शक्तिशाली स्थानों का चयन करता है ।इन शक्ति स्थल पर वास्तु और स्थान देव के अनुकूल यज्ञ आदि कर्म तथा आध्यात्मिक साधना इस प्रकार से की जाती है कि त्रयताप से चेतना को मुक्ति मिले तथा संचित कर्म,क्षय,प्रायश्चित आदि के लाभार्थी हो सके। विश्रांति द्वारा की गई साधना सदैव फलप्रोत और सफल होती है।

ऋत गामिनी – सत्य का अनुसरण

सत्य सनातन की दिशा में अनन्य उप मार्ग है जो प्रधान पद को संरक्षित एवं संवर्धित करता है। यह मार्ग ऋत का अनुसरण करते हुए आर्थिक संपन्नता और संप्रभुता प्रदान करती है। शुभ एवं मांगलिक अनुष्ठान युक्त वस्तु पदार्थों को धार्मिक वाणिज्य हेतु निर्माण एवं क्रय विक्रय की प्रक्रिया ऋतगामिनी में समायोजित होगी ।यह वस्तु पदार्थ किसी न किसी रूप में आध्यात्मिकता एवं सनातन रथ की अनुगामिनी होगी। आधुनिक तकनीक एवं प्राचीन विधाओं का सम्मिलित स्वरूप जो मानव को सत्य का अनुसरण करते हुए ऋत की ओर गमन कराएगी।

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योग मित्र  – योग्य जिज्ञासु

मानव प्रारब्ध की योग्यताओं की संभावना मात्र है। जीवन काल में इन बीजों के पुष्पित होने का प्रयास अनायास ही चलता रहता है । क्रियमाण कर्म के भटकाव में योग्य जिज्ञासु अधिकांशतः किंकर्तव्यविमूढ़ रहते हैं। लक्ष्य का अनुसंधान सिद्धो के बिना मुश्किल एवं कील कंटको से पूर्ण होता है। ऋतान्वेषी योगायन उन्हें योग्य जिज्ञासुओ से मैत्री स्थापित करके उन्हें उपयुक्त सिद्धो या पंथो से मिलवाने का प्रयास करता है। यह योगमित्र अपने विषय और विद्या को प्रखर और परिमार्जित करके अन्य योग मित्रों को ऋतान्वेषी योगायन से जुड़ेंगे। मित्रता का यह क्रम सर्वांगीण विकास आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित होगा ताकि ऋतान्वेषी परिकल्पनाओं का सर्वश्रेष्ठ समायोजन हो सके।